जिस 'दर्द' और 'आह' को हम जगजीत सिंह के गाए ग़ज़लों में महसूस करते हैं उस दर्द को जगजीत सिंह ने अपनी असल जिंदगी में भी जीया है। शायद जगजीत सिंह के सीने में छिपा यह वो दर्द ही था जो उनकी आवाज बनकर ग़ज़ल के रुप में सामने आया।
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उस शाम ये गजल गाते-गाते रो रहे थे जगजीत सिंह, रुके तो आ गई बेटे की मौत की खबर
August 22, 2018
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