MeToo मूवमेंट पर बोले आदिल, यौन शोषण को सहने या चुप रहने की कोई ज़रुरत नहीं

Mohit
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आदिल हुसैन उन कलाकरों में से हैं जो अपने सिलेब्रिटी स्टेटस की चिंता किए बगैर सामाजिक महत्व के मुद्दों पर बेझिझक बात करते हैं और उनका अभिनय करियर भी छोटा नहीं है। असम के इस बेहतरीन एक्टर ने कई दिलचस्प फिल्मों में काम किया है और वो कमर्शियल सिनेमा पर भी उतनी ही पकड़ रखते हैं जितनी आर्ट फिल्मों पर। इन दिनों गोवा में चल रहे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में एक हिंदी न्यूज चैनेल से बातचीत के दाैरान उन्होंने असम में बंगाली हिंदुओं और असमी लोगों के बीच चल रही खींचतान पर भी बात की। आदिल कहते हैं कि दुनिया में 40 हज़ार सालों से पितृसत्ता हावी रही है अब अचानक तो महिलाओं को बीच का मंच दिया नहीं जाएगा। इसमें समय लगेगा और जो लोग कहते हैं कि फेमिनिज़्म जीत गया है तो नहीं। अभी लड़ाई लंबी है और इसे और आगे जाना चाहिए। हमारे सिनेमा में आज भी महिलाओं को केंद्र में रखकर फिल्में नहीं बन रही है और इसे बदले जाने की आवश्यक्ता है। MeToo मूवमेंट पर आदिलफिल्मों में चल रहे MeToo मूवमेंट पर आदिल कहते हैं कि ये बहुत ज़रुरी था। यौन शोषण को सहने या चुप रहने की कोई ज़रुरत नहीं है। इस कैंपेन के बाद कम से कम फिल्म निर्माताओं को डर लगेगा कि वो ऐसी कोई कोशिश न करें। आलोकनाथ पर आरोप लगाने वाली संध्या मृदुल के दोस्त हैं आदिल और आदिल कहते हैं कि वो जानते थे कि संध्या के साथ ऐसा हो रहा है। इन मामलों में आगे आकर बात करना ज़रुरी है और अब वो हो रहा है। स्वार्थी लोग के अपने हित के लिए आम जनता को बनाते हैं निशानाहाल ही में असम में एक बंगाली नाटक के मंचन पर रोक लगी थी। सरकार द्वारा कला पर लगाई इस रोक को लेकर आदिल अपने विचार रखते हैं। अपने गृहराज्य असम के बारे में बात करते हुए आदिल कहते हैं कि साल 1979 में जब से असम मूवमेंट की शुरुआत हुई है, वहां काफी खूनखराबा हो चुका है। इससे पहले वहां लोग आपस में मिल कर रहते थे लेकिन कुछ स्वार्थी लोग अपने हितों के लिए आम जनता को निशाना बनाते हैं। बांग्ला भाषी नाटक पर रोक लगाना सरासर अनुचितएक बांग्ला भाषी नाटक पर रोक लगाना सरासर अनुचित था। कोई भारत की किसी भी भाषा में आकर अपनी बात कह सकता है। लेकिन अब भाषा को भी भेदभाव का माध्यम बना लिया गया है और यही भेदभाव वहां भी हो रहा है। आदिल के अनुसार हम इस समय एक अजीब संसार में हैं, ऐसा लगता है जैसे समुद्र मंथन चल रहा हो. कुछ खराब चीज़ें निकल रही हैं लेकिन कुछ समय बाद सब ठीक होगा। हम महाभारत के समय के लोग हैं बस समस्या ये है कि इस महाभारत में मुझे कोई कृष्ण नहीं दिखाई पड़ता। फिल्मों को लेकर चर्चा में आए आदिल बता दें कि आदिल हुसैन खासा चर्चा में हैं क्योंकि उनकी एक फिल्म ‘What will people say’ को साल 2019 में होने वाले ऑस्कर अवॉर्ड के लिए नॉर्वे की ओर से आधिकारिक एंट्री के तौर पर भेजा गया है। ये पहली बार नहीं है जब आदिल हुसैन की किसी फिल्म को इतना बड़ा सम्मान मिला हो। वो साल 2013 में ‘लाइफ ऑफ पाई’ फिल्म का हिस्सा रहे थे और इस फिल्म के निर्देशक आंग ली को ऑस्कर भी मिला था।

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